✎ AI भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी को पूरा करने में सहायक होगा।
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**AI भारत की स्वास्थ्य सेवा की कमी को पाटने में मदद कर सकता है: रिपोर्ट**
भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बढ़ती जनसंख्या, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) जैसे हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर के बढ़ते बोझ तथा डॉक्टरों, नर्सों और अस्पतालों की कमी का दबाव बढ़ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा जारी एक ज्ञान पत्र के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विशेषज्ञता को बढ़ाकर, निदान में सुधार कर तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार कर इस बढ़ती खाई को पाटने में मदद कर सकती है, खासकर छोटे अस्पतालों और वंचित क्षेत्रों में। 2026 में भारत की जनसंख्या 1.47 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 65% से अधिक मौतें गैर-संचारी रोगों के कारण होंगी। इसके अतिरिक्त, 2036 तक 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 23 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा की मांग और बढ़ेगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में प्रति 10,000 लोगों पर केवल 9.6 डॉक्टर हैं, जबकि वैश्विक औसत 18.3 है। इसी प्रकार, नर्सिंग कर्मियों की संख्या 27.2 प्रति 10,000 है, जबकि वैश्विक औसत 40.5 है। अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता भी वैश्विक औसत से काफी कम है। एआई का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि निदान, नैदानिक निर्णय लेने और स्क्रीनिंग में सहायता कर विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने पहले ही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, इंडियाAI मिशन, SAHI, BODH और राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 जैसे पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में एआई के लिए आधार तैयार कर लिया है। अगला चुनौतीपूर्ण कार्य एआई को सफल पायलट परियोजनाओं से नियमित नैदानिक उपयोग में लाने के लिए एआई-तैयार स्वास्थ्य ड
स्रोत: Times of India
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