✎ तेलंगाना राज्य में ग्राम विकास समितियों (वीडीसी) द्वारा सामाजिक बहिष्कार और जुर्माने लगाने की घटनाओं पर तेलंगाना पिछड़ा वर्ग आयोग (टीजीसीबीसी) ने कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**BC कमीशन ने ग्राम विकास समितियों को सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ चेताया**
हाल ही में तेलंगाना राज्य के निज़ामाबाद जिले में लगभग 90 पीड़ितों ने ग्राम विकास समितियों (वीडीसी) द्वारा सामाजिक और जातिगत बहिष्कार के आरोप में तेलंगाना पिछड़ा वर्ग आयोग (टीजीसीबीसी) में शिकायतें दर्ज कराईं। पीड़ितों ने बताया कि वीडीसी द्वारा गांव के विकास के नाम पर विभिन्न जातियों के लोगों पर जुर्माना लगाने और सामाजिक बहिष्कार करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। आयोग के अध्यक्ष जी. निरंजन ने इन घटनाओं पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को कानून का उल्लंघन करने वाली वीडीसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और तेलंगाना राज्य के गठन के दशकों बाद भी ऐसी कुप्रथाएं जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने एक विशेष समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें अतिरिक्त कलेक्टर, पुलिस और राजस्व अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इस समिति का उद्देश्य गांव स्तर पर वीडीसी की गतिविधियों पर निगरानी रखना होगा। आयोग ने पीड़ितों को त्वरित कानूनी सहायता और मुफ्त कानूनी मदद प्रदान करने पर भी जोर दिया। कलेक्टर इला त्रिपाठी ने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन सामाजिक बहिष्कार की घटनाओं पर रोक लगाने और वीडीसी द्वारा की जाने वाली ज्यादतियों को नियंत्रित करने के लिए कठोर कदम उठाएगा। यह मामला न केवल सामाजिक न्याय बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
**प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता**
बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में सामाजिक न्याय, संवैधानिक प्रावधान और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। सामाजिक बहिष्कार जैसी कुप्रथाएं संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करती हैं। इसके अलावा, ग्राम विकास समितियों जैसी संस्थाओं की भूमिका और उनके द्वारा किए जाने वाले अतिक्रमणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह शासन व्यवस्था और कानून के शासन से जुड़ा मामला है। ऐसे विषयों से संबंधित प्रश्न परीक्षाओं में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पूछे जा सकते हैं, जिससे उम्मीदवारों को सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों की गहरी समझ रखनी चाहिए।
स्रोत: The Hindu
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