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गुजरात सरकार ने एशियाई सिंहों के दूसरे घर से मालधारियों के स्थानांतरण की योजना की घोषणा की
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मालधारी स्थानांतरण योजना

✎ गुजरात सरकार ने बarda वन्यजीव अभयारण्य से मालधारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए प्रति परिवार 15 लाख रुपये की सहायता योजना की घोषणा की।

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गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 2 अक्टूबर, 2026 को वन महोत्सव के अवसर पर बarda वन्यजीव अभयारण्य (पोरबंदर एवं देवभूमि द्वारका जिलों में फैला 192.31 वर्ग किमी क्षेत्र) में रहने वाले मालधारियों (अर्ध-घुमंतू पशुपालकों) के लिए एक स्वैच्छिक स्थानांतरण योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को अभयारण्य क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित होने पर 15 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी, जबकि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार परिवार को अभयारण्य क्षेत्र में कोई अधिकार नहीं दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, स्थानांतरित परिवारों को 100 वर्ग गज का आवासीय भूखंड मुफ्त आवंटित किया जाएगा, जो अभयारण्य एवं पारिस्थितिकी-संवेदी क्षेत्र की सीमाओं से बाहर तथा नगर निगम सीमा से 10 किमी एवं नगरपालिका सीमा से 5 किमी दूर स्थित होगा। यदि परिवार पशुधन रखता है, तो उसके लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त भूखंड दिया जाएगा, जिसकी राशि 15 लाख रुपये से काट ली जाएगी। राज्य सरकार का दावा है कि इस स्थानांतरण से अभयारण्य का बड़ा हिस्सा वन्यजीवों के लिए मुक्त होगा तथा मानव अतिक्रमण से उत्पन्न जैविक दबाव कम होगा। साथ ही, सरकार का मानना है कि इससे मालधारियों को बेहतर आजीविका, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच मिलेगी तथा वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे। वर्ष 2025 की सिंह गणना के अनुसार गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या 891 हो गई है, जिसमें बarda को शेरों का नया उपग्रह आवास बताया गया है, जहाँ 17 शेर दर्ज किए गए हैं।

इस योजना का महत्व बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है। सर्वप्रथम, यह राज्य एवं केंद्र सरकार की पर्यावरण संरक्षण एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित नीतियों का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो पर्यावरणीय स्थिरता, जैव विविधता संरक्षण एवं वन्यजीव-मानव संघर्ष के समाधान के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए चलाई जा रही यह योजना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 एवं पर्यावरण संरक्षण कानूनों के अंतर्गत आती है, जो परीक्षाओं में कानूनी एवं प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में पूछा जा सकता है। दूसरी ओर, इस योजना में दी जाने वाली वित्तीय सहायता एवं आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन एवं सामाजिक न्याय के सरकारी प्रयासों को दर्शाती है, जो बैंकिंग परीक्षाओं में सरकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन एवं ग्रामीण विकास जैसे विषयों से जुड़े प्रश्नों के लिए प्रासंगिक है। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहते हैं, जो आरबीआई ग्रेड बी के जीएस पेपर में पर्यावरणीय स्थिरता एवं वैश्विक पर्यावरण समझौतों जैसे विषयों के संदर्भ में पूछा जा सकता है।

स्रोत: The Indian Express


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