✎ AI स्मृति लागत वृद्धि से भारत में उपकरणों की कीमतें बढ़ रही हैं, आयात बिल पर दबाव डाल रही हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**AI की स्मृति भूख से भारत का आयात बिल और मुद्रास्फीति प्रभावित**
वर्तमान में वैश्विक स्तर पर AI क्रांति के कारण उच्च प्रदर्शन वाले स्मृति चिप्स (HBM, DRAM) की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है, जिससे आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल आ रहा है। भारत, जो इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का प्रमुख उपभोक्ता और असेंबलर है, इस वैश्विक प्रवृत्ति से प्रभावित हो रहा है। स्मृति चिप्स की कीमतों में 400% से अधिक की वृद्धि हुई है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ रहा है। विशेष रूप से, इलेक्ट्रॉनिक एकीकृत सर्किट्स के आयात मूल्य में मात्रा वृद्धि की तुलना में कई गुना अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो “चिपफ्लेशन” नामक इस घटना की ओर संकेत करता है। इससे लैपटॉप, स्मार्टफोन और पेन ड्राइव जैसे उपकरणों की कीमतों में वृद्धि हो रही है, हालांकि सीपीआई बास्केट में इनका भार कम होने के कारण व्यापक मुद्रास्फीति पर सीमित प्रभाव पड़ रहा है।
बैंकिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आयात बिल, व्यापार घाटा और मुद्रास्फीति जैसे आर्थिक संकेतकों पर प्रभाव पड़ रहा है, जो आरबीआई ग्रेड बी, बैंक पीओ और एसएससी जैसे परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, स्मृति चिप्स की कमी से भारत के आईटी और हार्डवेयर क्षेत्रों पर भी असर पड़ रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है। इस प्रवृत्ति को समझने से उम्मीदवार आर्थिक नीतियों और वैश्विक तकनीकी प्रवृत्तियों के बीच संबंध स्थापित कर सकते हैं, जो परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।
स्रोत: Mint
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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