प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**निर्वाचन आयोग की स्थापना और 1993 में तीन सदस्यीय निकाय बनने की कहानी**
निर्वाचन आयोग भारत का एक स्थायी संवैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को संविधान के अनुसार हुई थी। इसका मुख्य कार्य संसद, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनावों का पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करना है। शुरू में इसमें केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) होता था, लेकिन 1989 में इसे तीन सदस्यीय निकाय बनाने का निर्णय लिया गया। इसका कारण 1987 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त आर.वी.एस. पेरि शास्त्री द्वारा सरकार की मनमानी को रोकना था, जिसके बाद सरकार ने उनकी शक्तियों को सीमित करने के लिए आयोग को बहुसदस्यीय बना दिया। हालांकि, 1990 में सरकार ने इसे पुनः एक सदस्यीय कर दिया, लेकिन 1993 में तत्कालीन सीईसी टी.एन. शेषन की स्वतंत्रता से असंतुष्ट कांग्रेस सरकार ने इसे फिर से तीन सदस्यीय निकाय बना दिया। इस बदलाव के पीछे सरकार और सीईसी के बीच मतभेद तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता प्रमुख थी।
निर्वाचन आयोग की संरचना और कार्यप्रणाली का ज्ञान बैंकिंग, एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंकिंग परीक्षाओं में लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि एसएससी में संविधान और प्रशासनिक व्यवस्था के विषयों पर ध्यान दिया जाता है। आरबीआई ग्रेड बी में भी संवैधानिक निकायों की भूमिका और उनके कार्यों से जुड़े सवालों का महत्व होता है। इस प्रकार, निर्वाचन आयोग की स्थापना और उसके विकास की कहानी न केवल राजनीतिक इतिहास को समझने में मदद करती है, बल्कि परीक्षाओं में भी उपयोगी साबित होती है।
स्रोत: The Indian Express
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