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INS मंगरोल: नौसेना में शामिल हुई तीसरी ‘माहे क्लास’ ASW जहाज, जानिए इसकी खासियतें
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INS मंगरोल कमीशन प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Security

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INS मंगrol का जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह तीसरा माहे वर्ग का एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में पानी के भीतर छिपे खतरों, विशेषकर पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है। इस जहाज की मदद से नौसेना को अपतटीय ऊर्जा संस्थानों, बंदरगाहों और नौसैनिक ठिकानों की सुरक्षा में काफी सहायता मिलेगी। इसके अलावा, यह जहाज खोज और बचाव अभियानों तथा कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी अपनी भूमिका निभा सकेगा। इसकी स्वदेशी तकनीक और उन्नत सोनार प्रणाली इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाती है, जिससे भारत की नौसैनिक शक्ति में आत्मनिर्भनता बढ़ रही है।

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बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस तरह के रक्षा संबंधी मुद्दे राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी तकनीक और रक्षा उत्पादन जैसे विषयों पर प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण हैं। परीक्षाओं में इस जहाज के निर्माण से जुड़े तथ्यों जैसे स्वदेशी निर्माण, रक्षा बजट, तकनीकी विशेषताएं और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भनता जैसे बिंदुओं पर सवाल पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, यह विषय भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है, जो समसामयिक मामलों की तैयारी के लिए आवश्यक है।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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