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केरल उच्च न्यायालय ने आईडीएसएफएफके में सात फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक बरकरार रखी

✎ केरल उच्च न्यायालय ने आईडीएसएफएफके में 7 फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगाकर केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराया।

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केरल उच्च न्यायालय ने आईडीएसएफएफके में सात फिल्मों की अस्थायी स्क्रीनिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति बेपु कुरियन थॉमस ने बताया कि 346 फिल्मों में से 339 वृत्तचित्रों को पहले ही फिल्मोत्सव में प्रदर्शित करने की अनुमति मिल चुकी थी। शेष सात फिल्मों में से छह को गृह मंत्रालय और एक को विदेश मंत्रालय को उनकी विषय-वस्तु पर राय के लिए भेजा गया था। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि फिल्मों को अनुमति देने में कोई देरी या मनमानी नहीं की गई है। न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जिन सात फिल्मों पर विचार किया जा रहा था, उन्हें रोकना उचित था। यह मामला केरल राज्य चलचित्र अकादमी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा फिल्मों को प्रमाणन प्रमाणपत्र देने में देरी का आरोप लगाया गया था। अकादमी ने कहा था कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत केंद्र सरकार को प्रमाणन आवश्यकताओं से छूट देने का अधिकार है। यह निर्णय प्रशासनिक कानून, केंद्र-राज्य संबंध और फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए प्रासंगिक हैं। इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका और न्यायिक हस्तक्षेप का अध्ययन प्रशासनिक कानून और संवैधानिक प्रावधानों की समझ को गहरा करता है, जो सरकारी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।

स्रोत: The Hindu


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