प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
मद्रास उच्च न्यायालय ने पिछले पांच वर्षों में डीवीएसी द्वारा किए गए निरीक्षणों/छापों पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने डीवीएसी से यह रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पिछले पांच वर्षों में किए गए आकस्मिक निरीक्षणों/छापों की संख्या, उन निरीक्षणों के दौरान बरामद राशि की मात्रा, आरोप पत्र दाखिल किए गए मामलों की संख्या और उनकी स्थिति तथा यदि अभियोजन के बजाय अनुशासनिक कार्यवाही की गई हो, तो उसके विवरण और उनकी स्थिति शामिल हो। न्यायालय ने इस मामले को सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर को टाल दिया है। न्यायालय ने सरकार से यह अपेक्षा व्यक्त की है कि वह सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय में लाए जाने वाले नकदी की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के लिए समान दिशा-निर्देश या सरकारी आदेश (जी.ओ.) जारी करने पर अपने विचार प्रस्तुत करे। न्यायालय का मानना है कि आज के दौर में जब लगभग सभी भुगतान डिजिटल माध्यमों से किए जा सकते हैं, सरकारी कर्मचारियों द्वारा कार्यालय में बड़ी मात्रा में नकदी ले जाने की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, ऐसी सीमा निर्धारित करने से सरकारी कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी से भी बचाया जा सकेगा।
यह मामला बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार नियंत्रण और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन आवश्यक है। डीवीएसी द्वारा किए गए निरीक्षण और छापे भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के प्रयासों का हिस्सा हैं, जो बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बढ़ाने में सहायक होते हैं। एसएससी परीक्षाओं में भी भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों और सरकारी नीतियों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें डीवीएसी जैसे संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में भी भ्रष्टाचार नियंत्रण, सरकारी नीतियों और वित्तीय पारदर्शिता जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं, जो इस मामले से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। इस प्रकार, यह मामला न केवल करेंट अफेयर्स के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम में भी शामिल है।
स्रोत: The Hindu
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