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बिजनौर में बढ़ते तेंदुओं की संख्या: वन अधिकारियों की चिंता, सुरक्षा खतरा बढ़ा
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बिजनोर में तेंदुओं की बढ़ती संख्या

✎ उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में 2026 तक तेंदुओं की संख्या 444 से तीन गुना बढ़ने का अनुमान, यदि बंध्याकरण नहीं किया गया तो।

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**हिंदी नोट (प्राकृतिक परीक्षा-शैली):**

बिजनौर जनपद में तेज़ी से बढ़ते तेंदुओं की संख्या ने वन अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार, यदि इनकी संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो अगले पाँच वर्षों में यह संख्या तीन गुना होकर 1,336 तक पहुँच सकती है। इस क्षेत्र में पिछले वर्ष तेंदुओं की संख्या 444 थी, जिसमें से आधी मादा थीं। वन अधिकारियों का कहना है कि इन तेंदुओं के मानव बस्तियों में प्रवेश करने से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है, जिसके कारण इस वर्ष अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। तेंदुओं द्वारा गन्ने के खेतों में रहने के कारण वे मनुष्यों से कम भयभीत हो रहे हैं, जिससे संघर्ष की घटनाएँ और बढ़ रही हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने तेंदुओं की संख्या नियंत्रित करने हेतु ‘नसबंदी’ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें अगले पाँच वर्षों में 75% तेंदुओं की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, कुछ तेंदुओं को निर्धारित क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की भी योजना है। यह मुद्दा न केवल पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक चुनौतियों को भी प्रभावित करता है। बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में इस तरह के पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक मुद्दों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जहाँ वन्यजीव प्रबंधन, जनसंख्या नियंत्रण और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

स्रोत: The Indian Express


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