प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को लोक सेवा आयोग में नियुक्त किए जाने पर उनके वेतन से पेंशन काटी जा सकती है, यह सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है। न्यायालय ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) विनियम, 2004 के विनियमन 7(2) को बरकरार रखा है, जो आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्त सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की पेंशन को उस पद के वेतन से काटने की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के दो निर्णयों को रद्द करते हुए कहा कि “वेतन घटा पेंशन” का सिद्धांत “समान काम के लिए समान वेतन” के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता है। न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उत्तराखंड राज्य द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने प्रावधान को अल्ट्रा वायर्स घोषित करने में स्पष्ट त्रुटि की थी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि काटी गई पेंशन केवल कार्यकाल के दौरान निलंबित रहती है और अधिकारी के पद छोड़ने के बाद फिर से शुरू हो जाती है, जिसका अर्थ है कि पेंशन वापस नहीं ली जाती है, बल्कि केवल रोकी जाती है।
बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए यह निर्णय भारतीय राजव्यवस्था और संवैधानिक कानून के तहत एक महत्वपूर्ण विषय है। यह न्यायिक निर्णयों, विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की समझ को दर्शाता है, जो सरकारी सेवा शर्तों और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को प्रभावित करते हैं। उम्मीदवारों को “समान काम के लिए समान वेतन” (अनुच्छेद 14 और 39(d) से संबंधित) जैसे संवैधानिक सिद्धांतों और “अल्ट्रा वायर्स” जैसे कानूनी शब्दों की गहरी समझ होनी चाहिए। यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से संबंधित नियमों, विशेष रूप से सेवानिवृत्ति के बाद संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के संदर्भ में, पर भी प्रकाश डालता है, जो प्रशासनिक कानून और लोक प्रशासन के पहलुओं को कवर करता है।
स्रोत: lawtrend.in
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