✎ वर्ष 2025-26 में भारत से LRS के तहत लगभग 29 अरब डॉलर की राशि विदेश भेजी गई, जिससे रुपये के मूल्य में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए RBI ने LRS सीमा घटाकर 50,000 डॉलर करने का प्रस्ताव रखा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
**रुपया गिरावट: हड़बड़ी कोई नीति नहीं**
देश की राजधानी दिल्ली से दो परस्पर विरोधी संदेश निकल रहे हैं—एक तरफ रुपये की गिरावट को लेकर घबराहट, तो दूसरी तरफ हस्तक्षेप न करने की बात। जबकि बाजार स्थिरता के लिए एक स्पष्ट रणनीति चाहता है, जिसमें वैश्विक पूंजी के प्रवाह से उत्पन्न कमजोरियों को स्वीकार किया जाए। रुपये की गिरावट आयात महंगे बना रही है, जिससे कच्चे तेल और सोने की लागत बढ़ रही है। आरबीआई ने डॉलर की बिक्री और ब्याज दर बढ़ाकर हस्तक्षेप किया, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी बॉन्ड yields में कमी के कारण रुपया अभी भी दबाव में है। आरबीआई ने एलआरएस सीमा घटाने जैसे कड़े कदमों पर विचार किया है, जो बाजार में और घबराहट पैदा कर सकता है।
बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मुद्रा नीति, विदेशी मुद्रा भंडार, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक गतिशीलता जैसे विषय शामिल हैं। रुपये की गिरावट आयात लागत और विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करती है, जो बैंकिंग प्रणाली और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रासंगिक है। साथ ही, आरबीआई के हस्तक्षेप और एलआरएस जैसे नियामक उपाय प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने के लिए आवश्यक हैं।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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