
✎ उड़ीसा सरकार ने 2027 के पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों से पहले SEBC (सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़े वर्ग) समुदायों के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण बहाल करने हेतु न्यायमूर्ति प्रमथ पटनायक की अध्यक्षता में SEBC आयोग का गठन किया।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**एसईबीसी आयोग: ओडिशा का कदम ओबीसी आरक्षण की तकनीकीताओं से आगे बढ़ता है**
ओडिशा सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनकी राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए एक आयोग का गठन किया है, जो राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में उनके उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करेगा। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रामथ पटनायक कर रहे हैं, जिसे 2027 के पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले स्थापित किया गया है। इससे पहले, ओडिशा में 1995 से 2017 तक स्थानीय निकाय चुनावों में 27% आरक्षण लागू था, जिसे 2022 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वापस लेना पड़ा था, क्योंकि इसे सर्वोच्च न्यायालय के ‘ट्रिपल टेस्ट’ मानदंडों का पालन नहीं माना गया था। इस निर्णय से राज्य में एसईबीसी समुदायों के राजनीतिक अधिकारों को मजबूत करने और उनके हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
इस कदम का राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे एसईबीसी समुदायों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला बताया है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस आयोग के गठन के समय पर सवाल उठाए हैं, खासकर इसलिए कि चुनावों से कुछ महीने पहले ही इसे स्थापित किया गया है। इससे पहले महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकारों ने भी इसी तरह के आयोगों का गठन किया था, जिससे उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से आरक्षण संबंधी अनुकूल आदेश प्राप्त हुए थे। इस संदर्भ में, यह निर्णय राज्य में राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन परीक्षाओं के लिए जो राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर केंद्रित हैं, जैसे बैंक पीओ, एसएससी, आरबीआई ग्रेड बी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं।
स्रोत: The Hindu
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