
✎ वर्तमान जलवायु प्रतिबद्धताओं के पूर्ण कार्यान्वयन से भी 2035 तक वैश्विक उत्सर्जन में केवल 6% की कमी आएगी, जो 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य से काफी दूर है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**यूएन की रिपोर्ट: जलवायु प्रतिबद्धताओं के बावजूद 2035 तक वैश्विक उत्सर्जन में केवल 6% की गिरावट संभव**
संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) द्वारा जारी ‘2026 नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशंस (एनडीसी) सिंथेसिस रिपोर्ट’ के अनुसार, यदि देश अपनी मौजूदा जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह लागू भी कर लें, तो 2035 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 2019 के स्तर से केवल 6% कम हो पाएगा। यह गिरावट उस लक्ष्य से काफी कम है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए आवश्यक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया जाए, जिसमें सशर्त तत्व भी शामिल हैं, तो उत्सर्जन में केवल 9% की कमी ही संभव है। इससे पहले आई एक अन्य यूएन रिपोर्ट में कहा गया था कि 1.5 डिग्री सेल्सियस के तापमान लक्ष्य तक पहुंचना अब संभव नहीं है, और दुनिया 1.8 डिग्री सेल्सियस तक ही सीमित रहने का प्रयास कर सकती है। नई रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकतर नए एनडीसी लंबी अवधि के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों से जुड़े हैं, जिनमें 2040 से 2070 के बीच नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों को पूरा करने से सदी के अंत तक तापमान वृद्धि 1.7 से 2.3 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता होगी।
इस रिपोर्ट का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक है। बैंकिंग क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से संबंधित जोखिमों (जैसे पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन संबंधी जोखिम) को समझना आवश्यक है, क्योंकि आरबीआई और अन्य नियामक संस्थाएं इन जोखिमों को वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मान रही हैं। एसएससी परीक्षाओं में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय समझौतों, उत्सर्जन लक्ष्यों और उनके प्रभावों पर आधारित प्रश्न शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में जलवायु परिवर्तन से संबंधित नीतियों और उनके आर्थिक प्रभावों पर भी सवाल पूछे जा सकते हैं, जिससे उम्मीदवारों को जलवायु संबंधी वैश्विक प्रयासों की गहरी समझ होनी चाहिए।
स्रोत: orissapost.com
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