✎ प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के मूल कारणों और उनके निराकरण के उपायों पर ध्यान केंद्रित करें।
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**यूएनएफपीए रिपोर्ट: कम मजदूरी, गरीबी और कर्ज प्रवासी श्रमिकों को बेहतर जीवन की तलाश में धकेल रहे हैं**
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) द्वारा हाल ही में प्रकाशित दक्षिण भारत अंतरराज्यीय प्रवासन सर्वेक्षण (एसआईआईएमएस) 2026 के अनुसार, प्रवासी श्रमिकों के लिए बेहतर आजीविका की तलाश में कम मजदूरी, गरीबी, नौकरी की कमी और कर्ज प्रमुख कारणों में शामिल हैं। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 72% श्रमिकों ने माना कि प्रवास से उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, जबकि 57% प्रवासी अपने गंतव्य राज्य में काम करना जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, 86% से अधिक श्रमिकों के पास लिखित रोजगार अनुबंध नहीं हैं, जिससे उन्हें कल्याणकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में औसतन 3,313 रुपये कम मासिक वेतन मिलता है, जबकि केवल 19% श्रमिक ही अपने कल्याणकारी लाभों का आसानी से उपयोग कर पाते हैं। यह रिपोर्ट प्रवासन के आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डालती है, जो बैंकिंग और सरकारी नौकरियों के परीक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे श्रम बाजार की गतिशीलता, वित्तीय समावेशन और नीति निर्माण के मुद्दों को समझने में मदद मिलती है।
इस रिपोर्ट का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि यह प्रवासी श्रमिकों की वित्तीय असुरक्षा, कर्जग्रस्तता और कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंच की कमी जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। प्रवासन के कारण उत्पन्न होने वाले आर्थिक असंतुलन, श्रम कानूनों में कमियों और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच की चुनौतियों का विश्लेषण बैंकिंग प्रणाली के लिए नीति निर्माण और ग्राहक सेवा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी के परीक्षार्थियों को प्रवासन से संबंधित आर्थिक नीतियों, श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जो देश के समग्र आर्थिक विकास और शासन व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
स्रोत: Times of India
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