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चुनाव आयोग के प्रेस नोट से खुद पर लगे आरोप: क्या सीईसी पर महाभियोग संभव?

✎ चुनाव आयोग के प्रेस नोट से उसकी स्वयं की जवाबदेही तय होती है, जिससे महाभियोग की नींव मजबूत होती है।

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**हिंदी में लेख (प्राकृतिक परीक्षा शैली):**

योगेंद्र यादव के लेख के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा जारी 26 सितंबर के प्रेस नोट ने स्वयं के खिलाफ मामला बना दिया है। यह दो पृष्ठीय नोट मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सहित दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों के खिलाफ महाभियोग का कानूनी आधार प्रस्तुत करता है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) और 124(4) के तहत सीईसी को केवल “सिद्ध कदाचार या असमर्थता” के आधार पर ही हटाया जा सकता है। लेख में बताया गया है कि सीईसी ग्यानेश कुमार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या, फॉर्म 6 में अनधिकृत बदलाव और 97 मतदाताओं को गलत तरीके से हटाने के बाद पुनः शामिल करने के लिए झूठे दस्तावेज़ भरवाने जैसी गंभीर कानूनी उल्लंघन किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आयोग द्वारा बैठकों के एजेंडे और मिनट्स जारी न करने से इसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं।

यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन शामिल है। बैंकिंग परीक्षाओं में शासन व्यवस्था और कानूनी ढांचे के प्रश्नों में इसका उपयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी में भी संविधान के अनुच्छेदों, न्यायिक सिद्धांतों और चुनाव सुधारों से संबंधित प्रश्नों में इस घटना का संदर्भ दिया जा सकता है। इससे अभ्यर्थियों को संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और उनके संरक्षण के महत्व को समझने में मदद मिलेगी।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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