RBI GovernorNet interest marginBanking systemLenders✎ बैंकों का मार्जिन स्ट्रेस उच्च क्रेडिट वृद्धि और बढ़ती जमा लागत के कारण बना हुआ है, जिससे NIM में गिरावट आई है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
**आरबीआई गवर्नर ने बैंकों के मार्जिन तनाव को चिन्हित किया, और बैंकों को लगा रहा है कि यह जारी रहेगा**
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले सप्ताह देश के बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य की तारीफ करते हुए मार्जिन में गिरावट को लेकर चिंता जताई थी। जून 2026 तक के एक साल के दौरान बैंकिंग प्रणाली की शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) घटकर 3.21% रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.26% थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च जमा लागत और तेजी से बढ़ती ऋण वृद्धि के कारण धन की होड़ बनी हुई है, जिससे मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (एफसीएनआर) जमा योजना के तहत प्रवाह भी मार्जिन पर नकारात्मक असर डाल रहा है। कुछ बैंकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में खुदरा ऋण में वृद्धि से मार्जिन सामान्य हो सकता है, लेकिन अधिकांश बैंकों ने अनिश्चितता के कारण भविष्य के मार्जिन पर कोई मार्गदर्शन देने से इनकार कर दिया है।
इस मुद्दे का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। बैंकिंग क्षेत्र में एनआईएम का सीधा संबंध बैंकों की लाभप्रदता से है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। एसएससी परीक्षाओं में अर्थव्यवस्था से संबंधित सवालों के लिए यह जानकारी उपयोगी होगी, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक नीति के संदर्भ में इसका विश्लेषण किया जा सकता है। इसके अलावा, एफसीएनआर जमाओं और उनकी लागत पर प्रभाव जैसे तकनीकी पहलुओं को समझना भी परीक्षा की दृष्टि से लाभकारी होगा।
स्रोत: Mint
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