✎ अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण से देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
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‘आईएसआरओ अकेला देश की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकता’: अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण पर आलोचना पर डॉ. नारायणन
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर उठ रही आलोचनाओं के जवाब में कहा है कि देश की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अकेले इसरो पर्याप्त नहीं है और अंतरिक्ष क्षेत्र के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को विस्तार देने की ज़रूरत है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना होगा, क्योंकि वर्तमान में जहां 56 उपग्रह हैं, वहीं देश को सैकड़ों उपग्रहों की ज़रूरत है। नारायणन ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों का उद्देश्य उद्योग की भागीदारी और विस्तार को बढ़ावा देना है, जिसमें इसरो आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि इन सुधारों से अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विकास होगा, जिससे रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे, अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी और अधिक उपग्रहों का निर्माण संभव हो सकेगा।
इस संदर्भ में, डॉ. नारायणन ने जीएसएलवी-एफ17 द्वारा ईओएस-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के सफल प्रक्षेपण को देश के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने बताया कि जीएसएलवी मार्क-2 रॉकेट की क्षमता में 40 प्रतिशत तक सुधार हुआ है, जिससे अब तक के सबसे भारी उपग्रह का प्रक्षेपण संभव हो सका। इसके अलावा, उन्होंने कुळसैकरीपट्टनम अंतरिक्ष बंदरगाह परियोजना की प्रगति पर भी प्रकाश डाला, जिसका लक्ष्य मार्च 2027 तक पूरा होना है। गगनयान कार्यक्रम के संबंध में उन्होंने बताया कि पहली मानव रहित उड़ान इसी वर्ष प्रस्तावित है। यह सब घटनाक्रम देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे तकनीकी नवाचार और भविष्य की तैयारियों को दर्शाते हैं, जो आगामी बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए भी प्रासंगिक हैं।
स्रोत: orissapost.com
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