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उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण एवं नियुक्ति प्रक्रिया: जानिए पूरा प्रावधान — उच्च न्यायालय न्यायाधीशों के स्थानांतरण एवं नियुक्ति प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के स्थानांतरण और नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 222 तथा मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) द्वारा नियंत्रित होती हैं। राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के पश्चात ही किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण कर सकते हैं। एमओपी के अनुसार, स्थानांतरण का प्रस्ताव सर्वप्रथम भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श करके प्रारंभ किया जाता है, जिसमें संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के विचारों तथा संबंधित न्यायाधीश की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखा जाता है। सभी स्थानांतरण जनहित में किए जाते हैं, जिसका उद्देश्य देशभर में न्याय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है। उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के अंतर्गत होती हैं तथा यह प्रक्रिया वर्ष 1998 में तैयार किए गए एमओपी के अनुसार संचालित होती है, जिसे द्वितीय एवं तृतीय न्यायाधीश मामलों के निर्णयों के अनुपालन में तैयार किया गया था।

यह विषय बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी तथा एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन परीक्षाओं में संविधान के अनुच्छेदों, न्यायपालिका की संरचना तथा न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए, एमओपी के अनुसार नियुक्तियों में राज्य सरकारों तथा उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की भूमिका, उच्च न्यायालयों द्वारा रिक्तियों की पूर्व सूचना तथा न्यायाधीशों के व्यक्तिगत पहलुओं पर विचार जैसे बिंदु परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय तथा संवैधानिक प्राधिकारियों की भूमिका जैसे विषय भी सामान्य जागरूकता अनुभाग में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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