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एनआईआरएफ रैंकिंग में एचईआई की प्रगति — concept mind map
NIRF रैंकिंग ढांचाअध्यापन, शिक्षण एवं संसाधनशिक्षण गुणवत्ताअनुसंधान एवं व्यावसायिक प्रणालियांनवाचारस्नातक परिणामरोजगारआउटरीच एवं समावेशितासुलभताभरोसेमंद अवधारणापारदर्शिता
NIRF रैंकिंग ढांचा

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance

राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की शुरुआत 2015 में भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) की गुणवत्ता में सुधार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार, और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप एनआईआरएफ में भाग लेने वाले संस्थानों की संख्या 2021 में 6,272 से बढ़कर 2025 में 14,163 हो गई है। इसके अतिरिक्त, क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शामिल भारतीय संस्थानों की संख्या भी 2015 के 11 से बढ़कर 2027 में 52 हो गई है, जो उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में स्पष्ट प्रगति को दर्शाता है। सरकार द्वारा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (आरयूएसए/पीएम उषा), उत्कृष्ट संस्थान (आईओई) योजना और नए आईआईटी/आईआईएम/केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना जैसे प्रयासों से शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार हो रहा है, जिससे बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के स्रोत तैयार होते हैं।

एनआईआरएफ रैंकिंग के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार और उद्योग-अनुकूल कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा एनसीईआरटी, सीबीएसई, यूजीसी और एआईसीटीई के माध्यम से कम्प्यूटेशनल सोच, एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) और राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार हो रहा है, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय साक्षरता, एसएससी में तकनीकी कौशल और आर

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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