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एमपी हाईकोर्ट सख्त: यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में पारा होने का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट — concept mind map
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✎ यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में पारा होने के आरोप पर हाईकोर्ट ने त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को जलाने के बाद उत्पन्न राख में पारा मिलने के आरोप पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सात दिनों के भीतर राख की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और एके सिंह की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय करते हुए बोर्ड को आदेश दिया कि वह राख के नमूनों की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा जांच कराकर प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध कराएं। यह मामला वर्ष 2004 में दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें फैक्ट्री के जहरीले कचरे के सुरक्षित निस्तारण की मांग की गई थी। न्यायालय ने इससे पहले पीथमपुर स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) में राख के निस्तारण के दौरान आसपास के वार्डों में दूषित पानी की आपूर्ति के मुद्दे पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की थी, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न हो रहा है।

यह मामला न केवल पर्यावरणीय विनियमन और औद्योगिक कचरे के प्रबंधन से जुड़ा है, बल्कि इसका सीधा संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और शासन प्रणाली की जवाबदेही से भी है। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि औद्योगिक प्रदूषण और पर्यावरणीय अनुपालन के मुद्दे सीएसआर गतिविधियों, ऋण जोखिम आकलन और स्थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत आने वाले निवेश निर्णयों को प्रभावित करते हैं। एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में इस तरह के मामलों से संबंधित प्रश्न पर्यावरण कानून, सरकारी नीतियों और न्यायिक सक्रियता जैसे विषयों पर पूछे जा सकते हैं, जो शासन और नीति निर्माण के व्यापक परिप्रेक्ष्य को समझने में सहायक होते हैं।

स्रोत: amarujala.com


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