प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को ऋण सुविधाओं के लिए ऋण गारंटी प्रदान करने हेतु ऋण गारंटी योजना (सीजीएस) लागू की जा रही है, जिसे क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों तथा पिछड़े जिलों में स्थित इकाइयों सहित एमएसई को बिना किसी संपार्श्विक या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण उपलब्ध कराना है। सरकार ने इस दिशा में कई सुधार किए हैं, जैसे गारंटी की अधिकतम सीमा को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करना, वार्षिक गारंटी शुल्क को घटाकर 0.37% प्रति वर्ष करना तथा महिला नेतृत्व वाले एमएसई के लिए गारंटी सीमा में वृद्धि करना। इसके अतिरिक्त, आरबीआई के निर्देशानुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को 20 लाख रुपये तक के एमएसएमई ऋण के लिए संपार्श्विक स्वीकार न करने का आदेश दिया गया है, जबकि चिन्हित ऋण अपुष्ट जिलों (आईसीडीडी) में 10% शुल्क छूट एवं 5% अतिरिक्त गारंटी कवरेज प्रदान किया जा रहा है। तमिलनाडु में विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक विशेष योजना “तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (टीएनसीजीएस)” भी शुरू की गई है।
यह योजना बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंकिंग परीक्षाओं में एमएसएमई क्षेत्र को ऋण प्रवाह बढ़ाने हेतु सरकारी योजनाओं, आरबीआई के निर्देशों तथा सीजीटीएमएसई की भूमिका से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। एसएससी परीक्षाओं में भी योजनाओं के उद्देश्यों, गारंटी सीमाओं तथा आरबीआई के निर्देशों पर आधारित प्रश्नों की
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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