✎ राज्य के राजकोषीय घाटे में वृद्धि से विकास योजनाओं पर दबाव बढ़ा है, जिसके लिए राजस्व संग्रह और व्यय में सुधार जरूरी है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
राज्यों के राजकोषीय घाटे का बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो बैंकिंग और सरकारी नौकरी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी प्रासंगिक है। ओडिशा के मामले में, राज्य का राजकोषीय घाटा 2025-26 में 23,650.89 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम है। इसका मुख्य कारण राजस्व संग्रह में कमी और केंद्र से मिलने वाली अनुदानों में गिरावट है। राज्य सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय और ऋणों के कारण यह घाटा बढ़ा है, हालांकि राजस्व अधिशेष बना हुआ है। यह स्थिति उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो बैंक पीओ, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि इससे राजकोषीय नीति, सरकारी बजटिंग और आर्थिक नियोजन जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
इसके अलावा, ओडिशा जैसे राज्यों में राजकोषीय घाटे का बढ़ना केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों और राज्यों की स्वायत्तता पर भी सवाल उठाता है। बैंकिंग परीक्षाओं में राजकोषीय घाटे के प्रभाव, जैसे कि ब्याज दरों, मुद्रास्फीति और सरकारी ऋण पर पड़ने वाले असर पर भी सवाल पूछे जा सकते हैं। वहीं, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में राजकोषीय घाटे के आर्थिक और सामाजिक निहितार्थों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस प्रकार, यह विषय न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि प्रशासनिक और नीति निर्माण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
स्रोत: orissapost.com
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