✎ वन प्रबंधन क्षमता संवर्धन परियोजना जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण एवं वनाग्नि प्रबंधन में तकनीकी एवं जमीनी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने हाल ही में नई दिल्ली में जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से आयोजित ‘प्रभावी वन प्रबंधन परियोजना के लिए क्षमता संवर्धन’ कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव प्रबंधन में बदलती आवश्यकताओं, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के मद्देनजर वन कर्मियों की क्षमता को सुदृढ़ करना है। इसमें अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने, क्षेत्र-विशिष्ट क्षमता निर्माण मॉड्यूल विकसित करने और स्थानीय ज्ञान तथा आधुनिक तकनीकों के समन्वय पर जोर दिया गया है। परियोजना का कुल परिव्यय 537.10 करोड़ रुपए है, जिसमें जेआईसीए का योगदान 440.42 करोड़ रुपए है, जबकि शेष राशि भारत सरकार द्वारा वहन की जाएगी। यह सात वर्षीय परियोजना (2025-26 से 2031-32) सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जाएगी, जिसमें नए भागीदार राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस पहल का राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव होगा, विशेषकर वन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन शमन और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें सरकारी योजनाओं, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरणीय नीतियों और वन प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं, जो परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित होते हैं। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना के माध्यम से वनाग्नि प्रबंधन, डिजिटल रूपांतरण और अनुसंधान सहयोग जैसे नवीनतम तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो वर्तमान में चल रही सरकारी पहलों के साथ मेल खाते हैं। इस प्रकार, इस विषय से संबंधित प्रश्न परीक्षा में सामान्य जागरूकता, पर्यावरणीय नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे खंडों में पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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