✎ केन-बेतवा लिंक परियोजना में जनजातीय पुनर्वास के लिए केंद्र-राज्य समन्वय एवं वन अधिकार अधिनियम 2006 की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत जनजातीय समुदायों के पुनर्वास को लेकर जनजातीय कार्य मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि जल शक्ति मंत्रालय के अधीन कार्यरत केन-बेतवा लिंक प्राधिकरण द्वारा राज्य सरकारों को भूमि अधिग्रहण तथा पुनर्वासन एवं पुर्नस्थापन की गतिविधियाँ चलाने का निर्देश दिया गया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय इस परियोजना की संचालन एवं निगरानी समिति का सदस्य भी है, जो परियोजना प्रभावित परिवारों (पीएएफ) के पुनर्वासन एवं पुर्नस्थापन योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करती है। चरण-I में कुल 1,913 पीएएफ (जनसंख्या 8,339) प्रभावित हुए, जिनमें 648 अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवार शामिल थे। मंत्रालय को अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है जिसमें मुआवजे की राशि तो वितरित हुई हो, लेकिन लाभार्थियों तक नहीं पहुंची हो, किंतु विस्थापन संबंधी विभिन्न अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन को भेजी गई है। वन अधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर है, इसलिए इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा डेटा एकत्र नहीं किया जाता।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के चरण-II के दो प्रस्तावों को अनुमोदित किया है, किंतु इसके लिए राज्य सरकार को राष्ट्रीय पुनर्वासन नीति तथा वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना होगा। राज्य सरकार द्वारा पुनर्वासन एवं पुर्नस्थापन योजना की निगरानी की जाएगी तथा वन भूमि के हस्तांतरण से पूर्व वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकारों का निपटारा किया जाना अनिवार्य है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 4(5) का पालन किया जाए, जिसके तहत अधिकारों की मान्यता एवं सत्यापन पूर्ण होने तक किसी भी लाभार्थी को वन भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता। परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन एवं पुर्न
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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