✎ विधेयक केंद्र को खनिज नियंत्रण देने से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होगी।
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‘खनन विधेयक ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रहार’: बीजद प्रमुख ने माझी से सभी दलों की बैठक बुलाने को कहा
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की, ताकि संसद द्वारा गुरुवार को पारित खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ विरोध जताया जा सके। पटनायक ने कहा कि यह विधेयक ओडिशा की वित्तीय स्वायत्तता को छीन लेगा और राज्य के संसाधनों पर उसके संवैधानिक अधिकारों के लिए खतरा है। बीजद प्रमुख ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे पत्र में कहा कि विधेयक के प्रावधान ओडिशा जैसे खनिज संपन्न राज्यों को ‘अनुपातहीन रूप से प्रभावित’ करेंगे, जिससे राज्य को ‘भारी राजस्व हानि’ होगी और विकासात्मक योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। राज्यसभा द्वारा विधेयक पारित किए जाने के कुछ घंटे बाद ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस कानून को ‘काला कानून’ करार देते हुए राज्य के हर जिले, ब्लॉक, पंचायत और शहर में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। पटनायक ने अपने पत्र में केंद्र द्वारा नियम बनाने की एकमात्र शक्ति देने और राज्यों को खनिजों पर कर लगाने के अधिकार को सीमित करने वाले संशोधन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “ओडिशा का प्राकृतिक धन उसके लोगों का है और खनन से होने वाली आय राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याणकारी योजनाओं तथा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक है।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खनन संशोधन कानून राज्य के अधिकारों का हनन नहीं करता। पटनायक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य को खनिज भूमि पर कर एवं उपकर लगाने के अधिकार से वंचित करने से संघवाद और राज्य की राजस्व स्वायत्तता को गहरा आघात पहुंचा है तथा तुरंत सभी दलों की बैठक बुलाने की अपील की।
इस विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार खनिजों के नियमन एवं कराध
स्रोत: The Hindu
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