✎ डिजिटल भारत निधि ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं एवं तकनीकी नवाचार हेतु महत्वपूर्ण है, किंतु इसकी प्रगति में विलंब एवं चुनौतियां बनी हुई हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
**डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत योजनाओं/परियोजनाओं की समीक्षा**
डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) भारत सरकार द्वारा दूरसंचार सेवाओं को ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा दूरसंचार प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित एक महत्वपूर्ण कोष है। इसे वर्ष 2024 में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) का पुनर्नामकरण कर बनाया गया था। डीबीएन द्वारा वित्तपोषित प्रमुख योजनाओं में भारतनेट तथा सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों में 4जी मोबाइल परियोजनाएं शामिल हैं। संसदीय स्थायी समिति (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी) द्वारा प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में समिति ने डीबीएन के अंतर्गत चल रही योजनाओं की प्रगति का गहन आकलन किया है। समिति ने पाया कि भारतनेट के अंतर्गत केवल 30% ग्राम पंचायतों में कार्यात्मक ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध हैं, जबकि सुरक्षा संवेदनशील क्षेत्रों में 4जी टावरों की स्थापना में कठिन भूभाग एवं वन मंजूरी में देरी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। समिति ने इन चुनौतियों के समाधान हेतु राज्यवार प्रदर्शन ऑडिट, घरेलू कनेक्शन बढ़ाने तथा पीएसयू के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहनों की सिफारिश की है।
डीबीएन के अंतर्गत दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीटीडीएफ) जैसी योजनाओं के माध्यम से अनुसंधान को व्यावहारिक तकनीकों में परिवर्तित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। समिति ने पाया कि अनुसंधान के परिणामों को ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात करने में देरी हो रही है, जिसके लिए पायलट परियोजनाओं एवं नवाचारों को भारतनेट से जोड़ने की आवश्यकता है। यह विषय बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें दूरसंचार क्षेत्र की नीतियों, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, पीएसयू के प्रदर्शन तथा डिजिटल इंडिया जैसे सरकारी अभियानों के कार्य
स्रोत: PRS Legislative Research
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