✎ डीपफेक से निपटने हेतु सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं जिसमें AI कंटेंट लेबलिंग और गैरकानूनी सामग्री हटाने की समय सीमा शामिल है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture
सरकार ने डीपफेक और एआई-जनित सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा आईटी नियम, 2021 में संशोधन किया है। इसमें मध्यस्थों पर एआई कंटेंट को लेबल करने तथा गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा को 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। यह बदलाव साइबरस्पेस को सुरक्षित बनाने तथा उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी और दुष्प्रचार से बचाने के उद्देश्य से किया गया है। आईटी अधिनियम की धारा 66, 66सी, 66डी तथा 79 जैसे प्रावधानों के माध्यम से कंप्यूटर अपराधों, पहचान की चोरी तथा अश्लील सामग्री के प्रसार पर नियंत्रण रखा गया है। इसके अतिरिक्त बीएनएस की धारा 319, 336 तथा 353 में प्रतिरूपण, धोखाधड़ी तथा भ्रामक सूचना प्रसारित करने के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले कृत्यों पर अंकुश लग सके।
इस नियामक ढांचे का महत्व बैंकिंग, एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी अत्यधिक है। बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल लेनदेन की बढ़ती निर्भरता के कारण डीपफेक और एआई-जनित धोखाधड़ी के जोखिमों को समझना आवश्यक है। आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों की जवाबदेही तथा समयबद्ध शिकायत निवारण तंत्र का ज्ञान बैंकिंग परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों, जैसे साइबर अपराधों की रोकथाम तथा नियामक ढांचे से संबंधित विषयों में सहायक होगा। इसी प्रकार एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल इंडिया पहल तथा आईटी अधिनियम जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें यह नियामक बदलाव प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रासंगिक हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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