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नीति आयोग ने हाल ही में इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया है, जिसमें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के लिए ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ बताया गया है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने इस अवसर पर बताया कि दुनिया भर में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से बदलाव हो रहा है, जिसमें अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 10%, 25% और 50% से अधिक है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट का हवाला देते हुए कहा कि यह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का बिंदु बन सकता है, ठीक उसी तरह जैसे 1970 के दशक के तेल संकट ने ईंधन दक्षता बढ़ाने के वैश्विक प्रयासों को गति दी थी। भारत के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाना आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की 89% जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में 7.1% का योगदान देता है और लगभग 1.9 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है, इसलिए इस क्षेत्र को वैश्विक बदलाव के अनुरूप बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
इस पहल के तहत नीति आयोग द्वारा राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों के निर्माण और उनके कार्यान्वयन में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। आईईएमआई के दूसरे संस्करण में राज्यों के प्रदर्शन में सुधार देखा गया है, जहां सबसे अधिक स्कोर वाले राज्य का स्कोर 77 से बढ़कर 84 हो गया है और औसत राज्य स्कोर 36 से बढ़कर 40 हो गया है। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 92 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की है, जिसमें फेम, पीएम ई-ड्राइव, पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाएं और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास में तेल विप
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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