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पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026 में असम की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक — diagram
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असम स्मृति-चिन्ह संग्रह

✎ असम की जीवंत परंपराओं को प्रदर्शित करने वाली पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026 संस्कृति एवं संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Art & Culture

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पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी 2026 में असम की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की गई है, जो राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करती हैं। इसमें असम के हथकरघा, बांस-बेंत के शिल्प, पीतल की वस्तुएं तथा विरासत संबंधी कलाकृतियां शामिल हैं, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक स्मृति को दर्शाती हैं। इस संग्रह में पारंपरिक शिल्प के साथ-साथ ऐतिहासिक हस्तियों जैसे गोपीनाथ बोरदोलोई, श्रीमंत शंकरदेव और स्वर्गदेव चाओलुंग सुकाफा से संबंधित स्मृति चिन्ह भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 1894 के पथरुघाट युद्ध, बोरदुआ सत्रा तथा स्वाहिद स्मारक क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं और संस्थानों से जुड़ी कलाकृतियां भी इस संग्रह का हिस्सा हैं। यह ई-नीलामी नागरिकों, संग्राहकों तथा कला प्रेमियों को प्रधानमंत्री को भेंट किए गए स्मृति चिन्ह प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है, जबकि राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (एनजीएमए) में इनके कलात्मक एवं सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया गया है।

इस विषय का महत्व बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी तथा एसएससी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें भारतीय संस्कृति, परंपराओं तथा ऐतिहासिक विरासत से संबंधित तथ्यों को शामिल किया गया है। असम की हथकरघा परंपराएं, बांस-बेंत शिल्प तथा पीतल की वस्तुएं राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं, जो सामान्य ज्ञान तथा करेंट अफेयर्स के प्रश्नों में पूछे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इस ई-नीलामी के माध्यम से प्राप्त धनराशि का उपयोग नमामी गंगे कार्यक्रम के लिए किया जाता है, जो गंगा नदी के संरक्षण से संबंधित राष्ट्रीय मिशन है। इस प्रकार, यह विषय न केवल सांस्कृतिक अध्ययन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण तथा सरकारी योजनाओं के संदर्भ में भी प्रासंगिक है, जो विभिन्न प्रतियोग

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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