प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन रणनीति 2026-2030 पर जारी नवीनतम दस्तावेज़ सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा तैयार किया गया है, जो संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) के अनुरूप है। वर्ष 2018 से पर्यावरण लेखांकन के विभिन्न पहलुओं पर कार्य शुरू करने वाले मंत्रालय ने अब तक वन, जैव विविधता, आर्द्रभूमि, महासागर लेखा, मृदा, जल गुणवत्ता, ऊर्जा, अवशेष, शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अध्ययन तथा प्रकाशन किए हैं। इस व्यापक दायरे को देखते हुए, एमओएसपीआई ने पर्यावरण लेखांकन के विकास हेतु एक दूरदर्शी रणनीतिक ढांचा स्थापित करने के लिए “भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखांकन रणनीति 2026-2030” दस्तावेज़ जारी किया है, जिसमें प्रमुख कार्य बिंदुओं, आंकड़ों की कमियों को दूर करने, लेखांकन के दायरे का विस्तार करने तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और लक्ष्यों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह दस्तावेज़ राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 के अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन लेखांकन की मान्यता को और मजबूत करेगा तथा राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा।
इस रणनीति दस्तावेज़ का महत्व बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में पर्यावरण लेखांकन के माध्यम से टिकाऊ विकास, हरित वित्तपोषण एवं जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर नीति निर्माण में सहायता मिलेगी, जो एसबीआई, आईबीपीएस एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं। इसी प्रकार, एसएससी परीक्षाओं में पर्यावरणीय लेखांकन के सिद्धांत, राष्ट्रीय लेखा प्रणाली एवं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से उम्मीदवारों की तैयारी को मजबूत किया जा सकेगा। यह दस्तावेज़ सरकारी नीतियों, आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के मध्य संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो परीक्षाओं में विश्लेषणात्मक एवं नीति-आधारित प्रश्नों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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