✎ चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर विपक्षी दलों का एकजुट होना और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग प्रमुख मुद्दा है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
ममता बनर्जी और सीपीआई(एम) ने चुनाव आयोग संबंधी चिंताओं पर दशकों पुराने मतभेदों को दरकिनार करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पूर्व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी के आह्वान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों ने चुनाव आयोग (ईसी) की “घटती विश्वसनीयता” पर चिंता जताई। यह बातचीत ऐतिहासिक है, क्योंकि दोनों दलों के बीच लगभग तीन दशकों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था, जबकि सीपीआई(एम) लंबे समय से उनकी सरकार की आलोचना करती रही है। इस कदम का उद्देश्य संविधानिक मूल्यों और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए व्यापक विपक्षी एकजुटता बनाना है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए भी प्रासंगिक है।
इस बैठक का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सीपीआई(एम) ने सभी राजनीतिक दलों से “आपातकालीन स्थिति” को देखते हुए एकजुट होने का आह्वान किया है, जिसमें ममता बनर्जी ने तुरंत प्रतिक्रिया देकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाने का सुझाव दिया। यह राजनीतिक एकजुटता न केवल लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी पुनर्स्थापित करने का प्रयास है, जो आगामी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
स्रोत: The Hindu
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