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President Murmu: ‘Women have degrees, gold medals, but are not in workforce’ — concept mind map
Women: Degrees vs WorkforceAcademic AchievementsWorkforce ParticipationDegrees awardedIncreasingNot increasingGold medalsHighLowUniversity graduatesRisingStagnantNation-building roleEducation of childrenFormal employment
Women: Degrees vs Workforce

✎ महिलाओं की शैक्षणिक उपलब्धि के बावजूद कार्यबल में उनकी कम भागीदारी राष्ट्र निर्माण में एक बड़ी चुनौती है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के ७५वें दीक्षांत समारोह में महिला सशक्तिकरण और कार्यबल में उनकी भागीदारी को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में महिलाएं बड़ी संख्या में डिग्रियाँ और स्वर्ण पदक जीत रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कार्यबल में उनकी उपस्थिति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाई है। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली महिलाएँ देश निर्माण में पीछे नहीं हैं, बल्कि वे अपने बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के भविष्य को सुदृढ़ बना रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्य भी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे वह दिखाई दे या न दे। उनके अनुसार, महिलाओं की यह भूमिका राष्ट्र के विकास में उतनी ही योगदानकारी है जितनी किसी अन्य क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत रहने वाली। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं की शिक्षा और उपलब्धियाँ देश की प्रगति का प्रतीक हैं, लेकिन कार्यबल में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए सामाजिक और आर्थिक ढाँचे में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।

इस विषय का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और कार्यबल में उनकी भागीदारी आर्थिक विकास और समावेशी वृद्धि के लिए आवश्यक है। आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में राष्ट्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर प्रश्न पूछे जाते हैं, जहाँ महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और कार्यबल में उनकी भूमिका पर आधारित प्रश्न भी शामिल हो सकते हैं। एसएससी परीक्षाओं में भी समाज से संबंधित मुद्दों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, जहाँ महिला सशक्तिकरण और शिक्षा जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। राष्ट्रपति मुर्मू के वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि देश की प्रगति में महिलाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नीतिगत और सामाजिक स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता है, जो परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रासंगिक है।

स्रोत: The Indian Express


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