✎ मानव गतिविधियों ने मुंबई की जलवायु को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक गर्मी और वर्षा में असंतुलन देखा गया है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Environment
मुंबई में मानसून के दौरान मानवीय गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, जून से अगस्त 2026 के बीच मुंबई और नवी मुंबई में 92 दिनों में से 86 दिन मानवीय गतिविधियों जैसे वाहनों और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण स्थानीय मौसम के पैटर्न प्रभावित हुए। इसमें चरम गर्मी और वर्षा के दिन शामिल थे, जो सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जुड़े थे। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के अन्य जिलों जैसे डोंबिवली, ठाणे, कल्याण, पिंपरी, पुणे और शिवाजी नगर में भी मानवीय गतिविधियों के कारण क्रमशः 81, 79 और 76 दिन मौसम प्रभावित हुआ। इस अध्ययन में जलवायु शिफ्ट इंडेक्स (सीएसआई) का उपयोग किया गया, जिसमें मुंबई के लिए औसत स्कोर 4 से 5 रहा, जो गंभीर प्रभाव को दर्शाता है।
इस बदलाव के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून के दौरान वर्षा का असमान वितरण देखा जा रहा है। पहले जहां समान रूप से हल्की बारिश होती थी, वहीं अब अत्यधिक वर्षा के दिन बढ़ रहे हैं, जिसमें एक ही दिन में 100-200 मिमी बारिश दर्ज की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों के धुएं के कारण निचले वायुमंडल का तापमान बढ़ रहा है, जिससे बादलों के निर्माण में बाधा आ रही है। इससे मुंबई जैसे शहरों में गर्मी और असमान वर्षा की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे, कृषि और जनजीवन पर भी गंभीर प्रभाव डाल रही है। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और आर्थिक नीतियों के बीच संबंधों को समझने में मदद मिलती है, जो इन परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।
स्रोत: The Indian Express
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