✎ म्यूचुअल फंड्स के विदेशी दायित्व एवं परिसंपत्तियों में 2025-26 में वृद्धि, मुख्यतः अमेरिका एवं यूएई में निवेश के कारण।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**विदेशी देनदारियों एवं परिसंपत्तियों के सर्वेक्षण – 2025-26 (म्यूचुअल फंड्स)**
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 31 अगस्त, 2026 को जारी किए गए इस सर्वेक्षण में बताया गया है कि 2025-26 में म्यूचुअल फंड्स (MFs) की विदेशी देनदारियाँ बढ़कर 31.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गईं, जो मुख्यतः गैर-निवासियों द्वारा धारित इकाइयों के बाज़ार मूल्य में वृद्धि के कारण हुआ। इसी अवधि में विदेशी परिसंपत्तियाँ भी 23.9% बढ़कर 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुँच गईं, जिसमें विदेशी इक्विटी प्रतिभूतियों में निवेश प्रमुख रहा। परिणामस्वरूप, शुद्ध विदेशी देनदारियाँ घटकर 21.3 अरब अमेरिकी डॉलर रह गईं। यह सर्वेक्षण 53 भारतीय MFs और उनकी AMC द्वारा 2025-26 में धारित/अर्जित विदेशी परिसंपत्तियों एवं देनदारियों पर आधारित है। शीर्ष चार देश—संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर—गैर-निवासियों द्वारा धारित MF इकाइयों के कुल मूल्य का लगभग 50% हिस्सा रखते हैं। इसी प्रकार, AMC की विदेशी देनदारियाँ भी 18.1% बढ़कर 8.7 अरब अमेरिकी डॉलर हो गईं, जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और पोर्टफोलियो निवेश प्रमुख योगदानकर्ता रहे।
इस सर्वेक्षण का बैंकिंग, SSC और RBI ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में, यह विदेशी निवेश प्रवाह, बाज़ार गतिशीलता और विनिमय दर जोखिमों को समझने में सहायक है, जो बैंकों के अंतर्राष्ट्रीय परिचालनों और जोखिम प्रबंधन के लिए आवश्यक है। SSC परीक्षाओं में, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे विषयों से संबंधित प्रश्नों के लिए आधार प्रदान करता है। RBI ग्रेड बी जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाओं में, यह विदेशी पूंजी प्रवाह, विनियमन और नीति
स्रोत: RBI
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