✎ विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि भारत की आर्थिक स्थिरता और आरबीआई की प्रभावी नीतियों को दर्शाती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
**विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि: अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत**
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 अरब डॉलर बढ़कर 740.803 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे पूर्व सप्ताह में यह 12.422 अरब डॉलर बढ़कर 729.328 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। यह वृद्धि मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (600.67 अरब डॉलर) और सोने के भंडार (116.409 अरब डॉलर) में हुई बढ़ोतरी के कारण हुई है। RBI द्वारा जून में शुरू किए गए अनुकूल विदेशी मुद्रा स्वैप पहलों ने रुपये के तेज मूल्यह्रास के बीच 132 अरब डॉलर से अधिक के प्रवाह को आकर्षित किया है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में स्थिरता आई है।
यह वृद्धि बैंकिंग, SSC और RBI ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। बैंक पीओ और IBPS परीक्षाओं में विदेशी मुद्रा भंडार के घटने-बढ़ने का सीधा संबंध रुपये की स्थिरता, आयात-निर्यात संतुलन और RBI की नीतियों से होता है। SSC परीक्षाओं में इसके आर्थिक निहितार्थ, जैसे कि विदेशी निवेश, व्यापार घाटा और मुद्रा बाजार के स्थायित्व पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। RBI ग्रेड बी में इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार के घटकों—विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, एसडीआर, सोना और आईएमएफ में आरक्षित स्थिति—पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस प्रकार, यह विषय न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि वित्तीय प्रणाली और नीति निर्माण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
स्रोत: orissapost.com
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