✎ UN की विफलता के कारण विश्व शांति एवं सुरक्षा प्रभावित हो रही है, जिसके लिए सुरक्षा परिषद में सुधार आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
संयुक्त राष्ट्र (UN) अब अपने मूल उद्देश्य—अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने—को पूरा करने में असमर्थ हो गया है, ऐसा तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान विश्व नेताओं के समक्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष में 60 से अधिक संघर्षों—गाजा से लेकर यूक्रेन-रूस, म्यांमार, दारफुर, ईरान और लेबनान तक—में लाखों लोगों की जान गई और असंख्य लोगों को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा। एर्दोगन ने विशेष रूप से फिलिस्तीनियों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला, जहां गाजा और वेस्ट बैंक में हो रहे अन्याय ने मानवता के विवेक को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया, खासकर सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय कानून के समान अनुप्रयोग पर जोर दिया, ताकि शक्तिशाली और निर्बल दोनों के लिए न्याय सुनिश्चित हो सके।
यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें वैश्विक संस्थानों की कार्यप्रणाली, अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, और सुधार की आवश्यकता जैसे विषय शामिल हैं। परीक्षा में इस तरह के प्रश्न राजनीति एवं शासन व्यवस्था से संबंधित अनुभाग में पूछे जा सकते हैं, जैसे—संयुक्त राष्ट्र की संरचना, सुरक्षा परिषद के अधिकार, अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्व, या वैश्विक संघर्षों के कारण। इसके अतिरिक्त, तुर्की के राष्ट्रपति के बयान से यह भी समझा जा सकता है कि कैसे भू-राजनीतिक तनाव और असमान शक्ति संतुलन वैश्विक संस्थानों की प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं, जो कि आरबीआई ग्रेड बी के “अंतर्राष्ट्रीय संगठन और वित्तीय प्रणाली” जैसे विषयों से भी जुड़ा है।
स्रोत: news.un.org
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