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सागरमाला परियोजना: बंदरगाह आधुनिकीकरण से रसद लागत में कमी, जानिए नवीनतम अपडेट्स — सागरमाला परियोजना: बंदरगाह आधुनिकीकरण की प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

**सागरमाला परियोजना और बंदरगाहों का आधुनिकीकरण** देश के बंदरगाह-आधारित विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई सागरमाला परियोजना एक महत्वपूर्ण पहल है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत पाँच प्रमुख स्तंभों—बंदरगाह आधुनिकीकरण, बंदरगाह संपर्क, बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण, तटीय समुदाय का विकास तथा तटीय एवं अंतर्देशीय जल परिवहन—पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सरकार द्वारा प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता वृद्धि, दक्षता सुधार तथा जहाजों के टर्नअराउंड समय को कम करने के लिए नए बर्थ एवं टर्मिनल बनाए जा रहे हैं, मौजूदा बुनियादी ढाँचे का यंत्रीकरण किया जा रहा है, कैपिटल ड्रेजिंग के माध्यम से पानी की गहराई बढ़ाई जा रही है तथा सड़क, रेल और पार्किंग जैसी सहायक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, ‘वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस’ (ओएनओपी) जैसी पहलों से बंदरगाह प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख बंदरगाहों की कार्गो संभालने की क्षमता 2013-14 के ~1,400 एमटीपीए से बढ़कर मार्च 2026 तक 2,818 एमटीपीए तक पहुँच गई है।

इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य बंदरगाह संपर्क को सुदृढ़ करना तथा रसद लागत को कम करना है, जिससे व्यापार एवं उद्योग को लाभ मिल सके। इसके अंतर्गत सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से बंदरगाहों तक बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित की जा रही है। सरकार ने अब तक 294 रेल एवं सड़क संपर्क परियोजनाओं की पहचान की है, जिनमें से 84 पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 66 पर कार्य चल रहा है तथा 144 परियोजनाएँ अभी योजना के चरण में हैं। इसके अतिरिक्त, आंतरिक जलमार्गों पर बहु-मॉडल टर्मिनल्स तथा रो-रो टर्मिनल्स का विकास किया जा रहा है, जिससे

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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