✎ सुपर एल नीनो के कारण वैश्विक मृत्यु दर में वृद्धि होती है, जिससे जलवायु नीति और स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रभाव पड़ता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में ‘सुपर एल नीनो’ के कारण वैश्विक स्तर पर लगभग 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है, जिसमें भारत में अगले छह महीनों में 15,800 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतों की आशंका जताई गई है।** इस अध्ययन के सह-लेखक एमिली ग्रोवर-कोपेक ने बताया कि इस अनुमान के पीछे दो प्रमुख घटक थे – मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान-मृत्यु दर संबंध। उन्होंने बताया कि तापमान पूर्वानुमान के लिए यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के मौसमी पूर्वानुमान का उपयोग किया गया, जो मध्यम स्तर का अनुमान प्रस्तुत करता है। इसके अलावा, तापमान-मृत्यु दर संबंधों को ‘क्वार्टरली जर्नल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में प्रकाशित एक शोध पत्र पर आधारित किया गया, जोकि एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्र पत्रिका है। इस अध्ययन में 1996 से 2025 तक के 30 वर्षों के डेटा का उपयोग किया गया, ताकि नीति निर्माताओं के लिए प्रासंगिक और कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान की जा सके।
**इस अध्ययन का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन और इसके आर्थिक प्रभावों के बीच संबंध को दर्शाता है।** बैंकिंग क्षेत्र में, जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता और उनके प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जबकि सरकारी नौकरियों के लिए नीति निर्माण और संसाधन आवंटन में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना आवश्यक है। आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आर्थिक जोखिमों और उनके नियामक प्रभावों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि कैसे वैज्ञानिक मॉडलिंग और डेटा विश्लेषण का उपयोग नीति निर्माण में किया जाता है, जोकि शासन और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
स्रोत: Hindustan Times
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