
✎ तीन-भाषा नीति बहुभाषावाद को बढ़ावा देगी और राष्ट्रीय एकता में सहायक होगी, जिसे सीबीएसई 2027 से लागू करने पर विचार कर रहा है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीएसई से अगले शैक्षणिक सत्र 2027 से कक्षा छह के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति लागू करने पर विचार करने को कहा है, जिसमें दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया जाना है। न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने सीबीएसई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वह इस सुझाव पर विचार करें। सीबीएसई ने अपनी ओर से बताया कि मौजूदा कक्षा छह के छात्रों के लिए इस नीति को लागू करने में कठिनाई हो सकती है, क्योंकि इससे सीखने में अंतर आ सकता है और नीति के कार्यान्वयन में देरी हो सकती है। न्यायमूर्ति बागची ने सुझाव दिया कि बच्चों को सुविधा देने के लिए अगले शैक्षणिक वर्ष से तीन-भाषा नीति लागू करने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान में कक्षा छह में पढ़ने वाले छात्र इस वर्ष से तीन भाषाओं का अध्ययन करना चाहें, तो उन्हें भी इसकी अनुमति दी जा सकती है। एएसजी भाटी ने पीठ के सुझावों को नोट किया और कहा कि वे संबंधित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद बुधवार को वापस आएंगी। पीठ ने स्पष्ट किया कि उनके सुझाव पक्षों के अधिकारों और दावों पर पूर्वाग्रह के बिना हैं और वास्तविक मुद्दों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। सीबीएसई ने अपनी ओर से बताया कि उसने कक्षा छह से दस तक तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए 16 सितंबर को एक समिति का गठन किया है, जिसका नेतृत्व शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निदेशक भगवती प्रसाद कालाल कर रहे हैं। इस समिति में एनसीईआरटी के सचिव राजीव कुमार, सीबीएसई के निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. प्रज्ञा एम सिंह, केवीएस के अतिरिक्त आयुक्त (शैक्षणिक) चंदना मंडल और एनवीएस के उपायुक्त सोमवीर पूनिया शामिल हैं। यह समिति स्कूलों द्वारा पेश की जाने वाली भाषा संबंधी विकल्पों की समीक्षा करेगी,
स्रोत: orissapost.com
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