✎ डीएवाई-एनआरएलएम योजना ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सशक्त बनाती है, जिसमें वित्तीय समावेशन, कौशल विकास एवं स्वरोजगार पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मिशन के अंतर्गत लगभग 10.08 करोड़ महिलाओं को 92.30 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है, जिनमें से अधिकांश को भारतीय रिज़र्व बैंक और नाबार्ड के दिशा-निर्देशों के तहत बिना जमानत के ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं। यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं को वित्तीय समावेशन प्रदान करता है, बल्कि उनके कौशल विकास, उद्यमिता और सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देता है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) और सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी) जैसी संस्थाओं के माध्यम से इन समूहों को निरंतर प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन (2025) के अनुसार, डीएवाई-एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों की औसत पारिवारिक आय में 49% की वृद्धि हुई है, जबकि 58% महिलाओं ने आत्मविश्वास में वृद्धि की जानकारी दी है। यह कार्यक्रम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है, क्योंकि इन समूहों को ऋण प्रदान करने से बैंकों के ग्राहक आधार में वृद्धि होती है।
डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत लखपति दीदी पहल जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में 3.46 करोड़ लखपति दीदियों का निर्माण हुआ है। यह पहल न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और सामाजिक
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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