प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ३१ अक्टूबर, २०२६ को प्रकाशित एक रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (एमएपीसीईटी) द्वारा प्लेसमेंट डेटा की पुष्टि किए बिना ही करोड़ों रुपये के भुगतान का दावा पूरी तरह से निराधार है। मंत्रालय की ओर से जारी तथ्यात्मक रिपोर्ट में बताया गया है कि एमएपीसीईटी को अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत वर्ष २०२१-२२ में २,९४५.३७ लाख रुपये आवंटित किए गए थे, जिनका उपयोग ४,९५२ प्रशिक्षुओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देने में किया गया। भुगतान की प्रक्रिया भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार तीन किस्तों में की जाती है, जिसमें तीसरी किस्त प्लेसमेंट के सत्यापन के बाद ही जारी की जाती है। चूंकि किसी भी संस्था ने प्लेसमेंट संबंधी मानदंडों को पूरा नहीं किया, इसलिए तीसरी किस्त का भुगतान नहीं किया गया। इस प्रकार, आरोपित भ्रष्टाचार का कोई आधार नहीं है, और भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप रही है।
यह मामला बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे शासन व्यवस्था, पारदर्शिता एवं सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। विशेष रूप से सरकारी खर्चों की निगरानी, सब्सिडी एवं कल्याणकारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास एवं रोजगार सृजन से संबंधित सरकारी पहलों के बारे में भी जानकारी रखना आवश्यक है, जो अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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