Karnataka High CourtKPSC Chairperson✎ गवर्नर द्वारा राज्य कैबिनेट की सलाह के बिना पीएससी अध्यक्ष का निलंबन असंवैधानिक था।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सलाह के बिना ही निलंबन का आदेश पारित किया था, जिससे यह कानूनन अवैध हो गया। न्यायमूर्ति सुराज गोविंदराज ने 18 अगस्त को दिए गए आदेश में कहा कि राज्यपाल के पास राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत मामले को सर्वोच्च न्यायालय में भेजने की सिफारिश करने तक किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के सदस्य के निलंबन को वैध ठहराया गया था।
इस मामले की प्रासंगिकता बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत राज्यपाल की शक्तियों और राज्य मंत्रिमंडल की भूमिका का ज्ञान परीक्षा में पूछा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, लोक सेवा आयोगों की स्वायत्तता और पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी प्रशासनिक कानून और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। इस मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि संवैधानिक पदाधिकारियों की नियुक्ति और निलंबन में कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जो प्रशासनिक न्यायशास्त्र के अध्ययन के लिए प्रासंगिक है।
स्रोत: The Hindu
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