✎ तमिलनाडु की राजकोषीय क्षमता में सुधार हेतु राजस्व संग्रहण एवं व्यय में दक्षता बढ़ाना आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
टमिलनाडु की राजकोषीय क्षमता में सुधार के लिए किए गए सुझावों पर हाल ही में जारी किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि राज्य की मुख्य चुनौती यह नहीं है कि वह बहुत अधिक उधार ले रहा है, बल्कि वह राजस्व संग्रह और व्यय में अपेक्षाकृत कम दक्षता प्रदर्शित करता है। ‘कर्नी रिपोर्ट’ के अनुसार, राज्य का राजस्व घाटा ७८,३२४ करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि उसका सकल राज्य उत्पाद (GSDP) के सापेक्ष कर संग्रह मात्र ५.४५% है। अध्ययन में बताया गया है कि बेहतर अनुपालन, मूल्यांकन, निगरानी और परियोजना अनुशासन के माध्यम से राज्य अपनी राजकोषीय क्षमता में १.२ लाख करोड़ रुपये तक की वार्षिक वृद्धि कर सकता है, बिना किसी नए कर या अतिरिक्त उधार के। इसके अलावा, राज्य को जीएसटी संग्रह, स्टांप शुल्क, खनन रॉयल्टी और पूंजीगत व्यय में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।
इस अध्ययन के निष्कर्ष बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। बैंकिंग क्षेत्र में, राजकोषीय सुधार और राजस्व संग्रहण दक्षता राज्य सरकारों की ऋणशोधन क्षमता और वित्तीय स्थिरता से सीधे जुड़े होते हैं, जो बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता को प्रभावित करते हैं। एसएससी परीक्षाओं में, इस विषय से संबंधित प्रश्न राज्यों के बजट, कर संग्रह और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर केंद्रित हो सकते हैं, जिनकी तैयारी में यह अध्ययन सहायक सिद्ध होगा। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में, राजकोषीय नीति, राजस्व संग्रहण और राज्य सरकारों के वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जिनके लिए यह अध्ययन महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करता है।
स्रोत: The Hindu
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