✎ डीपफेक से उत्पन्न मानहानि के मामलों में न्यायालयों की भूमिका और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही बढ़ रही है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से संबंधित एआई-जनित और डीपफेक वीडियो हटाएं, जो उनकी इथेनॉल नीति को लेकर फर्जी आरोप लगाते थे। न्यायमूर्ति अरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने यह आदेश गडकरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये वीडियो उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक थे। न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री को हटाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ रही है, जिससे व्यक्तियों को बार-बार अदालतों का रुख करना पड़ता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि गडकरी द्वारा ऐसे किसी भी कंटेंट की शिकायत की जाती है, तो उसे भी हटाया जाएगा।
यह मामला राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर फर्जी सूचनाओं के प्रसार को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत प्रासंगिक है। परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया पर नियंत्रण की आवश्यकता और सरकारी नीतियों के प्रति जनता के विश्वास को बनाए रखने जैसे मुद्दों पर पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग और इसके कानूनी एवं तकनीकी समाधानों पर भी प्रश्न बन सकते हैं, जो डिजिटल इंडिया और तकनीकी विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
स्रोत: The Hindu
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