✎ महिला संपत्ति स्वामित्व बढ़ाने वाली सरकारी योजनाएं उनके आर्थिक सशक्तिकरण में सहायक हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
भारत सरकार की विभिन्न योजनाएं महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार, 15-49 वर्ष की आयु वर्ग की केवल 42.3% महिलाएं ही घर की मालकिन हैं, जबकि पुरुषों में यह प्रतिशत 60.1 है। इसी प्रकार, जमीन के मालिकाना हक में महिलाओं का हिस्सा मात्र 31.7% है, जो पुरुषों के 42.3% से काफी कम है। इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं, जैसे पीएमएवाई-ग्रामीण और पीएमएवाई-शहरी, जिनमें घरों का आवंटन महिलाओं के नाम या संयुक्त रूप से किया जाता है। इसके अतिरिक्त, महिला समृद्धि योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी पहलें ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान कर रही हैं। भूमि अधिकार अभिलेखों में लिंग संबंधी कॉलम शामिल करने का निर्णय भी महिला भूमि मालिकों के अधिकारों को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस संदर्भ में, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए यह जानकारी अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व से ऋण तक पहुंच बढ़ती है, जिससे बैंकों को नए ग्राहक मिलते हैं और वित्तीय समावेशन को बल मिलता है। एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में इस विषय से संबंधित प्रश्न polity एवं governance के अंतर्गत पूछे जा सकते हैं, जैसे सरकारी योजनाओं के उद्देश्य, उनके कार्यान्वयन के तरीके, और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव। इसके अलावा, राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आंकड़ों का विश्लेषण भी सामान्य जागरूकता अनुभाग में पूछा जा सकता है, जिससे परीक्षार्थियों को देश की जनसांख्यिकी और सरकारी नीतियों के बारे में गहन जानकारी प्राप्त होती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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