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Tariffs, conflicts demand policy rethink: C. Rangarajan — concept mind map

✎ वैश्विक संघर्ष और टैरिफ वृद्धि के बीच भारत को आत्मनिर्भरता एवं रक्षा उत्पादन पर ध्यान देना होगा।

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

**तारिफ़, संघर्षों के कारण नीति में पुनर्विचार की ज़रूरत: सी. रंगराजन**

भारत के पूर्व आरबीआई गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष सी. रंगराजन ने हाल ही में स्टेला मैरिस कॉलेज द्वारा आयोजित एक विशेष व्याख्यान में कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और टैरिफ जैसी बाधाओं के कारण भारत को अपनी आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि देश को उन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी, जहां इनपुट या वस्तुओं की आपूर्ति वैश्विक स्तर पर बाधित हो सकती है, जैसे रक्षा उत्पादन, चिप निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अनुकूलन। रंगराजन ने स्वीकार किया कि यह उदारीकरण के सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के कारण ऐसा करना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक चुनौतियाँ मुख्य रूप से घरेलू कमज़ोरियों के बजाय बाहरी झटकों का परिणाम हैं। 35 वर्षों की उदारीकरण यात्रा पर विचार करते हुए रंगराजन ने बताया कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला बनाने के लिए नीतियों में सुधार करना होगा। यह बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नीति निर्माण, आर्थिक सुधार और वैश्विक व्यापार के मुद्दों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

स्रोत: The Hindu


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