plutusacademy
Supreme Court restricts stay of Allahabad HC order against Gautam Buddha Nagar DM to strictures, costs — labelled illustration

✎ सुप्रीम कोर्ट ने अलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सीमित करते हुए डीएम पर strictures और मुआवजे पर रोक लगा दी है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

**सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर डीएम के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने को केवल निंदा और लागत तक सीमित रखा**

सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर, 2026 को दिए गए अंतरिम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी मेधा रूपम के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर उन्हें पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में केवल हाईकोर्ट की निंदा और लागत की राशि पर रोक लगाई, जबकि मूल फैसले के अन्य हिस्सों को प्रभावी रहने दिया। यह मामला तब चर्चा में आया जब एक अधिवक्ताओं के समूह ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि इस मामले को विशेष बेंच को सौंपा जाना और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा को बंद कर देना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीर चिंता उत्पन्न करता है।

इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि याचिकाकर्ता एक लोक सेवक होने के साथ-साथ भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की पुत्री हैं। एनएसए के तहत हिरासत को लेकर हुई कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम सहित अन्य अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया था। यह मामला न केवल प्रशासनिक जवाबदेही बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है, जो आने वाली परीक्षाओं जैसे बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी के लिए महत्वपूर्ण है।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites