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Auction of 91-Day, 182-Day and 364-Day Treasury Bills — labelled illustration

✎ ट्रेजरी बिल सरकार के अल्पकालिक वित्तपोषण का प्रमुख साधन है, जिसमें विभिन्न अवधि के बिलों की नीलामी आरबीआई द्वारा नियमित रूप से आयोजित की जाती है।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity

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**ट्रेजरी बिलों की नीलामी (91-दिन, 182-दिन और 364-दिन) का महत्व**

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 9 सितंबर, 2026 को 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के ट्रेजरी बिलों की नीलामी की घोषणा की गई है, जिसमें कुल 24,000 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। यह प्रक्रिया सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से धन जुटाने का एक प्रमुख साधन है, जो देश की आर्थिक स्थिरता और राजकोषीय नीति को दर्शाती है। बैंकिंग परीक्षाओं जैसे IBPS, SBI PO और RBI ग्रेड बी में इस तरह के मौद्रिक उपकरणों की भूमिका, उनकी नीलामी प्रक्रिया और प्रतिभागियों के प्रकार (प्रतिस्पर्धी एवं गैर-प्रतिस्पर्धी) से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, SSC परीक्षाओं में भी सरकारी ऋण और राजकोषीय प्रबंधन से जुड़े तथ्यों का महत्व रहता है।

इस नीलामी में प्रतिस्पर्धी और गैर-प्रतिस्पर्धी दोनों प्रकार के निवेशकों को शामिल किया जाएगा, जिसमें खुदरा निवेशकों के लिए 5% तक की सीमा निर्धारित है। RBI की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन बोली लगाई जा सकेगी, जबकि तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में भौतिक बोली भी स्वीकार की जाएगी। इस तरह की नीलामियों से सरकार को अल्पकालिक वित्तपोषण प्राप्त होता है, जबकि निवेशकों को सुरक्षित और तरल परिसंपत्तियों में निवेश का अवसर मिलता है। यह विषय बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली की समझ के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों के केंद्र में रहता है।

स्रोत: RBI


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