✎ राष्ट्रीय गीत के नियमों का राज्य सरकारों द्वारा पालन अनिवार्य है, अन्यथा संविधानिक विवाद उत्पन्न हो सकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को 21 सितंबर, 2026 को भेजे गए पत्र में राज्य सरकार द्वारा 8 सितंबर को जारी उस सरकारी आदेश (जीओ) पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, जिसमें “वंदे मातरम” के केवल दो पदों के गायन की अनुमति दी गई थी। राज्यपाल ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि यह आदेश केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन है और राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 (2026 में संशोधित) के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 73, 162, 256 और 257(1) के तहत राज्य की सीमाओं से बाहर है, क्योंकि राष्ट्रीय गीत का विनियमन राज्य सूची में शामिल नहीं है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक संस्करण केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है और राज्य सरकार इसे बदलने का अधिकार नहीं रखती।
इस विवाद का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें संवैधानिक प्रावधानों, केंद्र-राज्य संबंधों, राष्ट्रीय प्रतीकों के विनियमन और कानूनी ढांचे जैसे विषय शामिल हैं। परीक्षा में इस प्रकार के मुद्दों पर प्रश्न संविधान के अनुच्छेदों, राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, केंद्र-राज्य विवादों और न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में पूछे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, राज्यपाल की भूमिका, सरकारी आदेशों की वैधानिकता, राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और संविधान के संघीय ढांचे से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक विवाद का विषय है, बल्कि संवैधानिक सिद्धांतों और राष्ट्रीय एकता के महत्व को भी रेखांकित करता है, जो परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
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