✎ बाइक टैक्सी सार्वजनिक परिवहन नहीं, सुरक्षा और नियामक तैयारियों के आधार पर प्रतिबंधित।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
कर्नाटक सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया है कि बाइक टैक्सियाँ सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं हैं, क्योंकि इनमें सुरक्षा मानकों की कमी, दुर्घटना दर में वृद्धि, भीड़भाड़ और सीमित उपयोगिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि दोपहिया वाहनों को टैक्सियों के रूप में उपयोग पर प्रतिबंध लगाना उचित, आनुपातिक और सार्वजनिक हित में है। राज्य का कहना है कि यह प्रतिबंध मोटरसाइकिलों के व्यावसायिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि केवल यात्रियों को ले जाने पर रोक है। इसके अलावा, राज्य ने कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम, 2025 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे श्रमिकों को वैकल्पिक आजीविका के अवसर उपलब्ध हैं।
इस मामले में उच्च न्यायालय के जनवरी 2026 के फैसले को राज्य द्वारा चुनौती दी गई है, जिसमें एकल पीठ के आदेश को खारिज कर दिया गया था, जिसने राज्य द्वारा नीति तैयार किए जाने तक बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लगा दी थी। राज्य का तर्क है कि उच्च न्यायालय के फैसले से राज्य और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों की विवेकाधीन शक्तियाँ कम हो गई हैं, जिससे परमिट देने की प्रक्रिया महज औपचारिकता बन गई है। राज्य ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा मोटरसाइकिलों को मोटर कैब और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के समान मानना गलत है, क्योंकि मोटरसाइकिलों को कानून के तहत सार्वजनिक परिवहन के साधन के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।
**परीक्षा के लिए प्रासंगिकता:** बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी परीक्षाओं में राजनीति विज्ञान के तहत शासन, नीति निर्माण और न्यायिक सक्रियता जैसे विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस मामले में राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष सार्वजनिक नीति, नियामक ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, जो इन परीक्षाओं के लिए प्रासंगिक है। इसके अतिरिक्त, कर्नाटक
स्रोत: The Hindu
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